उत्तराखंड के दुर्गम गांवों में पहुंची मोबाइल क्रांति, 557 नए टावरों से 4G कनेक्टिविटी


उत्तराखंड के पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। डिजिटल भारत निधि के तहत लगाए गए 557 नए मोबाइल टावरों के माध्यम से सैकड़ों दूरस्थ गांवों को पहली बार प्रभावी मोबाइल नेटवर्क से जोड़ा गया है।

राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट के प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी देते हुए केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डा पेम्मासानी चंद्रशेखर ने राज्यसभा में बताया कि डिजिटल भारत निधि के माध्यम से विशेष रूप से पहाड़ी, सीमावर्ती और अब तक संचार सुविधाओं से वंचित गांवों में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए विभिन्न परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन परियोजनाओं के तहत 28 फरवरी, 2026 तक 557 टावर स्थापित कर उत्तराखंड के 1,231 गांवों को फोर जी नेटवर्क से जोड़ा गया है।

राज्य के कुल 16,456 गांवों में से 16,305 गांवों में फोर जी मोबाइल सेवाएं उपलब्ध हो चुकी हैं, जो लगभग पूर्ण कवरेज को दर्शाता है। वहीं 4,729 गांवों में फाइव जी नेटवर्क की शुरुआत हो चुकी है, जिससे प्रदेश तेजी से नई पीढ़ी की संचार तकनीक की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार की भारतनेट परियोजना के तहत भी ग्रामीण क्षेत्रों में ब्राडबैंड कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है।

28 फरवरी, 2026 तक उत्तराखंड की 1,993 ग्राम पंचायतों को ब्राडबैंड सेवाओं के लिए तैयार किया जा चुका है। देशभर में यह आंकड़ा 2,14,921 ग्राम पंचायतों तक पहुंच गया है।

सरकार ने संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत लगभग 2.64 लाख ग्राम पंचायतों को रिंग आधारित कनेक्टिविटी से जोडऩे और बिना ग्राम पंचायत वाले 3.8 लाख गांवों तक मांग के आधार पर इंटरनेट सुविधा पहुंचाने की योजना भी स्वीकृत की है। इससे उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल समावेशन को नई गति मिलने की उम्मीद है।



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