मियांवाला में 8.63 करोड़ की लागत से विकसित हुआ जल-सृष्टि पार्क, पुराने जलस्रोत को मिला नया जीवन

देहरादून | 20 अगस्त 2026

मुख्यमंत्री धामी के पर्यावरण संरक्षण के विजन को धरातल पर उतार रहा एमडीडीए

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के विजन को आगे बढ़ाते हुए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने मियांवाला स्थित पुराने जौहड़ और तालाब क्षेत्र का कायाकल्प कर इसे आधुनिक ‘जल-सृष्टि पार्क’ के रूप में विकसित किया है। करीब 8.63 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह पार्क अब क्षेत्रवासियों के लिए प्रकृति, स्वास्थ्य, मनोरंजन और सुकून का नया सार्वजनिक स्थल बन गया है।

पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप लंबे समय से उपेक्षित पड़े जौहड़ और पुराने जलस्रोत को संरक्षित करते हुए आसपास के क्षेत्र का व्यवस्थित सौंदर्यीकरण किया गया है। परियोजना का उद्देश्य केवल क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाना नहीं, बल्कि जल संरक्षण, हरित क्षेत्र के विकास और स्थानीय पारिस्थितिकी को मजबूत करना भी है।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने जल-सृष्टि पार्क का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पार्क परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी रोपा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में एमडीडीए ऐसी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें विकास के साथ प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित हो।

जल संरक्षण के साथ आधुनिक सुविधाएं

जल-सृष्टि पार्क में पुराने जलस्रोत को नया स्वरूप देने के साथ आमजन के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। पार्क में उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी शैली में मुख्य प्रवेश द्वार, योग डेक, योग आधारित मूर्तिकला, गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

तालाब के आसपास सुरक्षा रेलिंग लगाई गई है। वहीं जलीय फूल, मछलियां, पक्षी और हरियाली पार्क की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाते हैं। लोगों के लिए नौकायन जैसी गतिविधियों की भी व्यवस्था की गई है।

यह पार्क बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और परिवारों के लिए एक बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया गया है, जहां लोग प्रकृति के बीच समय बिताने के साथ योग, वॉकिंग और मनोरंजन जैसी गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे।

जीर्ण तालाब से खूबसूरत जल-सृष्टि पार्क तक

मियांवाला का यह क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षा का शिकार था। जौहड़ और तालाब क्षेत्र के कायाकल्प के तहत जलस्रोत को संरक्षित करते हुए उसके आसपास हरित क्षेत्र और जनसुविधाएं विकसित की गई हैं।

तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। एमडीडीए की यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चला जा सकता है।

पारंपरिक पहाड़ी शैली में तैयार हुआ प्रवेश द्वार

जल-सृष्टि पार्क को आधुनिक सुविधाओं के साथ उत्तराखंड की स्थानीय संस्कृति और वास्तुशैली से भी जोड़ा गया है। पार्क का मुख्य प्रवेश द्वार पारंपरिक पहाड़ी शैली में तैयार किया गया है।

इसके अलावा योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, गजीबो, वॉकिंग ट्रैक और बैठने के लिए गार्डन बेंच जैसी सुविधाएं लोगों को आकर्षित करेंगी। पार्क में विकसित खुले हरित क्षेत्र इसे शहर के बीच एक शांत और प्राकृतिक स्थान का स्वरूप देते हैं।

सिटी फॉरेस्ट के बाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और पहल

एमडीडीए की ओर से विकसित जल-सृष्टि पार्क को सिटी फॉरेस्ट के बाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। जौहड़ और पुराने जलस्रोत के पुनर्जीवन से क्षेत्र की सुंदरता बढ़ने के साथ जल संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

नौकायन और अन्य गतिविधियों के माध्यम से लोगों को जलस्रोतों और प्रकृति से जोड़ने का प्रयास भी किया गया है। इससे पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

विकास के साथ हरियाली और जल संरक्षण पर जोर

एमडीडीए का फोकस अब ऐसी परियोजनाओं पर है, जिनमें शहरी विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहे। पुराने तालाब, जौहड़, प्राकृतिक जलस्रोत और हरित क्षेत्रों को संरक्षित कर उन्हें जनोपयोगी स्वरूप देने से शहर को बेहतर सार्वजनिक स्थल मिलने के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी संभव होगा।

मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसी सोच का परिणाम है। यह परियोजना जलस्रोत के संरक्षण, हरियाली के विकास, पर्यावरण संरक्षण और आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का एकीकृत उदाहरण बनकर सामने आई है।

बंशीधर तिवारी ने कहा— पुराने जलस्रोतों को बचाना प्राथमिकता

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून के विकास में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। मियांवाला का पुराना तालाब और जौहड़ क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षित था, जिसे 8.63 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया गया है।

उन्होंने कहा कि उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण करना नहीं, बल्कि जलस्रोत का संरक्षण, जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना और आमजन को बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी प्राकृतिक जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।

मोहन सिंह बर्निया ने कहा— विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ जरूरी

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि मियांवाला जल-सृष्टि पार्क विकास और पर्यावरण संरक्षण का बेहतर उदाहरण है। जौहड़ की भूमि और पुराने तालाब क्षेत्र को संरक्षित करते हुए 8.63 करोड़ रुपये की लागत से इसका सौंदर्यीकरण किया गया है और इसे जनसुविधाओं से जोड़ा गया है।

उन्होंने कहा कि पार्क में हरियाली, योग, वॉकिंग और नौकायन जैसी सुविधाएं लोगों को प्रकृति के करीब लाने में मदद करेंगी। एमडीडीए भविष्य में भी शहर के प्राकृतिक संसाधनों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए जनहित से जुड़ी ऐसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा।

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