सौर ऊर्जा से रोशन होगा जरूरतमंद बच्चों का आशियाना, गर्मी से राहत के लिए कमरों में लगेंगे कूलर

धामी सरकार की पहल से नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास में सुविधाओं का विस्तार

करीब 100 बच्चों को मिलेगा सुरक्षित आवास, शिक्षा और संरक्षण का बेहतर वातावरण:

बच्चों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के तहत नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप जरूरतमंद बच्चों को बेहतर आवासीय एवं शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस पहल में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया जा रहा है।
छात्रावास में बच्चों की मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के साथ ऊर्जा संरक्षण, गर्मी से राहत और सामूहिक गतिविधियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।

10 केवीए सोलर प्लांट स्थापित :

छात्रावास की छत पर 10 केवीए क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कर दिया गया है। सौर ऊर्जा की यह व्यवस्था छात्रावास की विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होने के साथ ऊर्जा संरक्षण को भी बढ़ावा देगी। इससे छात्रावास को स्वच्छ एवं वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

बच्चों के कमरों में लगाए जाएंगे कूलर:

बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए छात्रावास के कमरों के लिए करीब 10 कूलर उपलब्ध करा दिए गए हैं। इन्हें जल्द ही कमरों में स्थापित किया जाएगा। इससे गर्मी के मौसम में बच्चों को अधिक आरामदायक आवासीय वातावरण उपलब्ध हो सकेगा।

सामूहिक गतिविधियों के लिए बनेगा नया हॉल:

छात्रावास में बच्चों की सामूहिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों के लिए एक नए हॉल का निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। प्रस्तावित हॉल का उपयोग बच्चों की सामूहिक गतिविधियों, शैक्षणिक कार्यक्रमों, बैठकों और अन्य आवश्यक आयोजनों के लिए किया जा सकेगा।

करीब 100 बच्चों को मिलेगा सुरक्षित आवास:

नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास की क्षमता करीब 100 बच्चों की है। यहां बच्चों के रहने और भोजन सहित आवश्यक आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
छात्रावास का उद्देश्य सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिस्थितियों में जीवन बिता रहे बच्चों को सुरक्षित आवास के साथ शिक्षा और संरक्षण का बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है। योजना के तहत 6 से 18 वर्ष तक के बच्चों को हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
इसके दायरे में अनाथ बच्चे, जिनके एक या दोनों माता-पिता नहीं हैं, बेहद कम वार्षिक आय वाले परिवारों के बच्चे, अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चे, दिव्यांग बच्चे, कूड़ा बीनने वाले, भिक्षावृत्ति में लगे तथा शहरी वंचित वर्ग के बच्चे शामिल हैं। इसके साथ ही विशेष देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को भी सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
सिर्फ आवास नहीं, बेहतर भविष्य की नींव
छात्रावास की इस पहल का उद्देश्य बच्चों को केवल रहने की सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण में शिक्षा से जोड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। सोलर प्लांट, कूलर और प्रस्तावित हॉल जैसी सुविधाओं के माध्यम से छात्रावास में रहने वाले बच्चों के लिए बेहतर और सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा रहा है।
सरकार और एमडीडीए का प्रयास है कि जरूरतमंद बच्चों को ऐसा वातावरण मिले, जहां वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें, अपनी प्रतिभा को विकसित कर सकें और भविष्य में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान:

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप प्राधिकरण विकास कार्यों के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़ी परियोजनाओं को भी प्राथमिकता दे रहा है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय छात्रावास में बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 10 केवीए सोलर प्लांट स्थापित किया गया है तथा कमरों के लिए कूलर उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने कहा कि करीब 100 बच्चों की क्षमता वाला यह छात्रावास जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्राधिकरण का प्रयास है कि यहां रहने वाले बच्चों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों और वे शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ें।

सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान:


एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि छात्रावास में बच्चों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। सोलर प्लांट की स्थापना के साथ कमरों में कूलर लगाए जा रहे हैं, जबकि सामूहिक गतिविधियों के लिए प्रस्तावित हॉल की टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का प्रयास है कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सकारात्मक वातावरण मिले, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपनी शिक्षा जारी रख सकें और भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।

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