निदेशक भर्ती में कम हुई अभ्यर्थियों की भागीदारी, 10 में से 6 ने दिया साक्षात्कार

देहरादून : उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के पांच परिसर संस्थानों में निदेशक पदों के लिए चल रही चयन प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, पांच निदेशक पदों के लिए कुल 10 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था, जिनमें से केवल छह अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार में भाग लिया।

साक्षात्कार में अपेक्षाकृत कम संख्या में अभ्यर्थियों की भागीदारी के बाद चयन प्रक्रिया और इसके लिए अपनाई गई व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इन पदों की भर्ती को प्रतिनियुक्ति के आधार पर किए जाने को लेकर पहले से ही न्यायालय के समक्ष प्रश्न उठाए गए हैं।

याचिका में भर्ती प्रक्रिया को केवल प्रतिनियुक्ति तक सीमित किए जाने, पात्र अभ्यर्थियों के दायरे तथा इस व्यवस्था के लिए उपलब्ध वैधानिक एवं प्रशासनिक आधार को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन मुद्दों पर न्यायालय में कार्यवाही जारी है और संबंधित पक्षों से प्रक्रिया के आधार पर स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। मामले में अंतिम स्थिति न्यायालय के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

सूत्रों के अनुसार, कुछ परिसर संस्थानों में पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में कुछ अभ्यर्थियों से अन्य संस्थानों के विकल्प पर विचार करने के लिए कहा गया। यदि ऐसा हुआ है, तो इस संबंध में यह प्रश्न उठता है कि अलग-अलग संस्थानों के लिए निर्धारित आवेदन प्रक्रिया के बावजूद विकल्प परिवर्तन किस नियम अथवा प्रक्रिया के तहत किया गया।

गौरतलब है कि प्रत्येक निदेशक पद के लिए ₹2,000 का अलग आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया था। ऐसे में यदि किसी अभ्यर्थी को बाद में ऐसे परिसर संस्थान के लिए विचार किया जाता है, जिसके लिए उसने पृथक रूप से आवेदन नहीं किया था, तो इस प्रक्रिया की वैधानिकता और आवेदन शुल्क से संबंधित स्थिति को स्पष्ट किया जाना अपेक्षित होगा।

हालांकि, इन प्रक्रियात्मक पहलुओं पर विश्वविद्यालय की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना अभी बाकी है।

पांच निदेशक पदों के लिए केवल छह अभ्यर्थियों द्वारा साक्षात्कार में भाग लेने की सूचना के बाद यह चर्चा भी शुरू हुई है कि क्या वर्तमान भर्ती व्यवस्था के कारण संभावित पात्र उम्मीदवारों का दायरा सीमित हुआ है। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित पात्रता और भर्ती प्रक्रिया के अनुसार ही चयन किए जाने की स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

ऐसे में अब निगाहें राज्य सरकार, विश्वविद्यालय तथा उच्च न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर हैं। विशेष रूप से प्रतिनियुक्ति के आधार पर भर्ती, पात्रता के दायरे, आवेदन एवं विकल्प परिवर्तन तथा चयन प्रक्रिया के संबंध में उठे प्रश्नों पर आने वाला स्पष्टीकरण इस पूरी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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