चयनित रोगियों में अपनाई जा रही डायरेक्ट एंटीरियर अप्रोच, मांसपेशियों को कम प्रभावित करने का दावा
देहरादून। कूल्हे के जोड़ में गंभीर क्षति, गठिया, एवैस्कुलर नेक्रोसिस, लगातार दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई से जूझ रहे रोगियों के लिए हिप रिप्लेसमेंट एक स्थापित उपचार विकल्प है। इसी क्षेत्र में अब डायरेक्ट एंटीरियर अप्रोच (डीएए) तकनीक का विकल्प देहरादून में भी उपलब्ध कराया गया है। हरि राम कोहली मेमोरियल हॉस्पिटल ने चयनित रोगियों के लिए इस तकनीक को अपनी हिप रिप्लेसमेंट सेवाओं में शामिल किया है।
टोटल हिप रिप्लेसमेंट में क्षतिग्रस्त कूल्हे के जोड़ को कृत्रिम प्रत्यारोपण से बदला जाता है। पारंपरिक शल्य विधियों में जोड़ तक पीछे या बगल की ओर से पहुंचा जाता है, जबकि डीएए में कूल्हे के जोड़ तक सामने की ओर से पहुंच बनाई जाती है।

मांसपेशियों के बीच प्राकृतिक अंतराल से जोड़ तक पहुंच:
डीएए तकनीक में शल्य चिकित्सक सामने की ओर से मांसपेशियों के बीच मौजूद प्राकृतिक अंतराल का उपयोग करते हुए कूल्हे के जोड़ तक पहुंचते हैं। इस विधि का उद्देश्य प्रमुख मांसपेशियों और आसपास के कोमल ऊतकों को अपेक्षाकृत कम प्रभावित करना है। इसी वजह से इसे मांसपेशी-संरक्षण वाली तकनीक भी कहा जाता है।
चयनित रोगियों में इस तकनीक के माध्यम से शुरुआती अवस्था में चलना-फिरना और सामान्य दैनिक गतिविधियों की ओर लौटना सहज हो सकता है। हालांकि, हिप रिप्लेसमेंट के परिणाम केवल शल्य विधि पर निर्भर नहीं करते। प्रत्यारोपण की सही स्थिति, पैरों की लंबाई में संतुलन, हड्डियों की गुणवत्ता, संक्रमण से बचाव और ऑपरेशन के बाद उचित पुनर्वास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जोड़ प्रत्यारोपण के साथ अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध:
हरि राम कोहली मेमोरियल हॉस्पिटल, देहरादून में लंबे समय से अस्थि एवं जोड़ संबंधी रोगों का उपचार किया जा रहा है। अस्पताल में हिप और घुटना प्रत्यारोपण के अलावा आर्थ्रोस्कोपी, खेल संबंधी चोटों, फ्रैक्चर तथा विभिन्न जटिल अस्थि शल्य प्रक्रियाओं की सेवाएं उपलब्ध हैं।
अस्पताल के अनुसार यहां मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, डिजिटल एक्स-रे, सी-आर्म और आधुनिक आर्थ्रोस्कोपी उपकरण उपलब्ध हैं। शल्य चिकित्सा, एनेस्थीसिया, नर्सिंग और पुनर्वास से जुड़ी टीमें समन्वय के साथ रोगियों की देखभाल करती हैं। अस्पताल में केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस), पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) सहित विभिन्न सरकारी और बीमा योजनाओं के अंतर्गत भी सेवाएं उपलब्ध हैं।

रोगी की स्थिति के अनुसार तय होगी तकनीक:
अस्पताल में अब चयनित रोगियों में डीएए के माध्यम से हिप रिप्लेसमेंट किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार इसका उद्देश्य पारंपरिक शल्य विधियों को पूरी तरह बदलना नहीं, बल्कि रोगी की स्थिति और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार उपचार के विकल्पों का विस्तार करना है।
हिप रिप्लेसमेंट का प्रमुख उद्देश्य दर्द में कमी, जोड़ की स्थिरता, बेहतर चलने-फिरने की क्षमता और सुरक्षित एवं टिकाऊ उपचार परिणाम प्राप्त करना है।



